आशिक़ों के महबूब के पैरो की धुल हूँ, हाँ मैं एक लाल गुलाब का फूल हूँ।

टूटा हुआ फूल खुशबू दे जाता हैं, बिता हुआ पल यादें दे जाता हैं, हर शख्स का अपना अंदाज होता हैं, कोई जिंदगी में प्यार तो, कोई प्यार में ज़िन्दगी दे जाता हैं।

जिसे पाया ना जा सके वो जनाब हो तूम, मेरी जिंदगी का पहला ख्वाब हो तूम, लोग चाहे कुछ भी कहे लेकिन, मेरी जिंदगी का एक सुन्दर सा गुलाब हो तूम।

तुम्हारी अदा का क्या जवाब दूँ, क्या खूबसूरत सा उपहार दूँ, कोई तुमसे प्यारा गुलाब होता तो लाते, जो खुद गुलाब है उसको क्या गुलाब दूँ।

प्यार के समंदर में सब डूबना चाहते हैं, प्यार में कुछ खोते हैं तो कुछ पाते हैं, प्यार तो एक गुलाब है जिसे सब तोडना चाहते हैं, हम तो इस गुलाब को चूमना चाहते हैं।

गुलाब की खूबसूरती भी फिकी सी लगती हैं, जब तेरे चेहरे पर मुस्कान खिल उठती हैं, यूँ ही मुस्कुराते रहना मेरे प्यार तू, तेरी खुशियों से मेरी साँसे जी उठती हैं।

रोज रोज रोज डे आये, फिर तू मेरे लिए गुलाब लाये, इसी बहाने से सही, तू मुझसे मिलने तो आये।

मेरे आंसुओं में तू ही छुपी रहती हैं, रोज आंखों से तू ही तो बरसती हैं, किसी गुलाब की बेटी है तू शायद, इसलिए मुरझाकर भी महकती हैं।

मेरी दीवानगी की कोई हद नहीं, तेरी सूरत के सिवा मुझे कुछ याद नहीं, मैं गुलाब हूँ तेरे गुलशन का, तेरे सिवाएं मुझ पर किसी का हक़ नहीं।

गुलाब लाये है तेरे दीदार के लिए, पर वो भी मुरझा गया तेरे नूर के आगे, तू ऐसा खूबसूरत हिरा हैं, की कोहिनूर भी सोचे तुझे पाने के लिए।